Wednesday, May 13, 2026

Unse ab meri baat nahi hoti

Unse ab meri baat nahi hoti
Saal bhar me chand si mulkaat bhar hoti
Unse ab meri baat nahi hoti
Badal gyi hai Mohabbat unke liye kya
Ya phir koi doosra aa gya hai unki jindgi me 
Ya phir waham hai mera jo kuch jaayeda sochta hoon..

Lekin phir karta hai main bhi hatt kar loon na baat karne ki
Lekin phir man nahi maanta.. 
 
Mujhko apna bolne waali ab mujhe anjaana smjhti hai.. 
Unse ab meri baat nahi hoti hai

Saturday, April 11, 2026

चलो फिर से लिखते हैं !






















चलो फिर से लिखते हैं,
चलो फिर कोई नज़्म लिखते हैं.
गद्य या पद्य लिखुँ, लाज़िमी है की कोई शब्द लिखूं। 
मोहब्बत के अलफ़ाज़ लिखूं या समाज को लिखूं।
अवाम को लिखूं क्या खुद को लिखूं। 
चलो आज फिर से लिखूं। 
बंधन को लिखूं या आज़ादी को लिखूं। 

Sunday, February 9, 2020

ऑटो एक्सपो 2020

नमस्ते दोस्तों! बीते दिन 6 फरवरी को मैं ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क के पास इंडिया एक्सपो सेंटर में चल रहे ऑटो एक्सपो 2020 में नयी नयी गाड़ियों को देखने गया. इस बार के ऑटो एक्सपो में कई नामी गिरामी कंपनियों ने मंदी के कारण भाग नहीं लिया. जिसमें टोयोटा और होंडा जैसी कम्पनियाँ शामिल हैं. इस बार चीनी कम्पनियाँ भी भाग लेने वाली थीं लेकिन कोरोना वाइरस की वजह से इन पर रोक लग गयी. कुछ तस्वीर
प्रवेश द्वार 
छोटी EV गाड़ियाँ 
 बेहद कारगर गाड़ी 
Old is always Gold! :)
World Car Award goes to..
Le Fil Rouge Concept Car
Mercedes-Benz Marco Polo- A camping Car 
New Vitara Brezza- Ever Youth choice
Some more sexy and muscular cars
Beautiful Arts on the Cars
I used to be a car. 




Sunday, August 11, 2019

दिल चाहता है.


एक शायरी करने का दिल चाहता है. दिल से दिल्लगी करनेका दिल चाहता है.
धड़कन तो गैरों के लिये धड़कती है, आज खुद के लिये धड़कने का दिल चाहता है.
पलटकर जिंदगी के पुराने पन्नो पे कुछ नया लिखने का दिल चाहता है.
फिर से उनसे दोस्ती, फिर से उनसे मोहब्बत करने का दिल चाहता है.
उनके प्यार को पाने की मशक्कत, उनके अश्क के दीदार करने की जरूरत;
मोहब्बत को सरेआम करने का दिल चाहता है, मोहब्बत में बदनाम होने का दिल चाहता है.
खुद से बातें करने का दिल चाहता है, खुद से खेलने का दिल चाहता है.
खुद से खुश रहने का इंतजाम करने का दिल चाहता है, सामने बैठे अजनबी को एक मुस्कान करने का दिल चाहता है.
भविष्य को सवांरने से ज्यादा वर्तमान को बर्बाद करने का दिल चाहता है.
एक कागज़, एक कलम, एक दवात और साथ में एक बददिमाग,
एक शायरी करने का दिल चाहता है, आज कुछ लिखने का दिल चाहता है. :)

Sunday, July 21, 2019

Windows 10 restart issue: Blue Screen Error: NMI_HARDWARE_FAILURE

I have Asus X540Y laptop which I had bought 2 years before. Laptop was running good but since last 5-6 months it was showing blue screen restart issue any time. Initially I was ignoring this issue. But gradually problem was happening more frequent. There was no such symptoms that I could doubt on my laptop. I researched on google. There were so many suggestions given to resolve this issue. But almost all was in vain. I tried some of those suggestions also.

Suggestion 1- Update your driver and windows.

I updated my all drivers and updated windows 10 to latest May 2019 major update also. But it did not help.

Suggestion 2- Clean your window.

I cleaned my windows 10 by resetting it to newly fresh windows option available in setting menu. It also did not help.

Suggestion 3- Format your laptop.

I formatted my laptop. Deleted all partition. Made new partition and install a fresh windows 10. After doing that, it was working well for few hours and again it was showing same issue.

After tried all the tricks, I doubted on the hardware. So, I brought my laptop to the Nehru Place, New Delhi, a well known hub for any kind of technology. There, I first preferred to go Asus Service centre. There I heard the terminology for this issue first time. A service centre person said, "This is a BOOT DUMP issue. It may be happening due to RAM, Hard disk or Motherboard. It may cost you around 4 to 5 thousand or above depending on reason." I packed my laptop and run away from the service centre. I made my mind to buy a new laptop in exchange offer. But, in Nehru Place there are so many local shops that provide laptop repair service etc, but it is hard to find out right shop and a right person with the reasonable price to resolve this issue. I was heading back to metro,but I was caught by a hawker who was yelling "Laptop/Mobile repair?". He took me to the following shop.
I told the whole story regarding my laptop to the repair engineer. He also told me that this issue might be coming due to RAM, HARD DISK or may be some motherboard issue. I told him that I recently installed a fresh windows. Then, he told me that there is a BIOS chip on the motherboard and he was 100% sure that the BIOS chip was causing the problem because windows was installed successfully, so there is no issue in the HDD and RAM. So, finally I asked for the price, he asked for RS. 1800 and final price was Rs. 1700. He repaired my laptop. You have to very careful while they repair your laptop. He tried to make more money by insisting on me to install new window as BIOS was changed. But I refused. Because, my windows was opening as normal after repairing.
Now my laptop is working fine and no annoying blue screen came ever since. Thanks to GADGETREPAIR. 

Tuesday, January 1, 2019

Happy New Year to Me! :)

                        My 1st day on New Year 2019

 Happy new year to me. So, today was the same day just like yesterday. My half day was spent on the bed, wasting my time. Even I did not bother to reply the new year messages to my friends and acquaintances. I know this attitude is not good. But this what I am now. 
 So talking about my planning for this new year. Some of hard decision I will have to take this year.
1- Try to be more energetic while doing my job. Will try to get and clear myself what I am doing.
2- I have to pass my Economic subject back paper exam. This time the main challenge is that whoever make the question paper, I have to prepare for both. Descriptive type as well as, tricky type question. 
3- I have to confess for our relationship before my parents. For that I want to be courageous person. 
4- More saving will be my main motto.
5- Exercise is necessary for healthy body. This will be my main motive. So for this, I will START to do Exercise. :P 
6- Improve my English language skill. With remembering more vocabularies and grammar patterns and will use them. 

 So these are my challenges for this year. May God bless me power to accomplish all these target.

Aameen! :P

Wednesday, April 11, 2018

नफरत उनका मेरी ज़िंदगी सी है।

हमनशीं नहीं रह गये अब उनके

कुछ अजनबी सा समझने लगे हैं वो,

उनसे दिल लगा कर खता कर ली थी क्या हमने

जो उनको अब नागवार लगने लगा है,

बातें भी बस वही चंद सी...

कोई नहीं..

जाने बहार जाने ज़िगर

धड़कता होगा शायद तेरा दिल अभी भी कभी मेरा नाम लेकर

उसी धड़कन को हमने अपनी ज़िंदगी बना लिया है।

तेरी अजनबी नज़र में अपना मुखड़ा निहार लिया है।

तुझसे मुहब्बत है मुझे, ये शायद तू भी जानती होगी।

पर न कहूँगा दिल का दर्द तुझसे

ये दर्द ही तो मेरे जीने का सहारा है।

Saturday, March 31, 2018

तुझे प्यार हम जो करने लगे थे

जब दिलों के धड़कन मिलने लगे थे

हर सांस तेरी मेरी जिन्दगी बनने लगे थे

तेरे प्यार में हम तो मचलने लगे थे

होठों ने जब तोड़ी थी सारी बंदिशें

जुबां ने जब बयाँ की थी अपनी ख्वाहिशें

बंद आँखों से भी दिख रही थी तेरे मन की चाहतें

दो जिस्म एक जान होने लगे थे

तेरी आगोश में हम तो पिघलने लगे थे

तेरी प्यास की बूंदों से प्यास बुझाया

तेरी धड़कनों की आहट से दिल मचलाया

जकड़ लिया फिर तुझको अपनी बाहों में

प्यार छलकती गयी तेरी आंहों में

करीब से और करीब होने लगे थे

तेरी बांहों में अब हम खोने लगे थे

तारे भी अब सोने लगे थे

तुझसे प्यार हम जो करने लगे थे.






Sunday, November 26, 2017

दिल्ली में पैसे ऐंठने के तरीके।

 हेल्लो मेरे इंटरनेट के लोग, कैसे हो? काफी दिनों बाद आपसे मुख़ातिब हो रहा हूँ। दरसल, आलस्य ने हमें घेर रखा है। हमारी कल्पना को बाँध रखा है। इसी सिलसिले में न हम हम रह पाये और आप से मुख़ातिब न हो पाये। मेरे द्वारा लिखे गये इन सारी चीजों का कोई पाठक होगा तो मेरे लिये उससे खुशी की बात और क्या हो सकती है।
अब आते हैं सीधे मुद्दे पर।

तो दिल्ली, देश के दिल में मेरे द्वारा अतिक्रमण किये हुये चार साल हो चुके हैं। और इसके odd even वाले हवा में साँस लेते हुये अभी भी जिंदा हूँ। चार साल के तज़ुर्बे के बावजूद अभी भी मैं कुछ लोगों द्वारा मामू बना दिया जाता हूँ। तो आज आपको बताऊंगा कि दिल्ली में मैं किस किस तरीकों से लूटा जा चुका हूँ। 

आप दिल्ली में हो और अगर कोई अनजान व्यक्ति / मोहतरमा आपको excuse me कह के बुलाये तो बहरे बन जाना। और ज्यादा आन पड़े तो अंधे भी। 

1- दिल्ली के टसनी भिखारी लोग: तो मैं बता दूँ कि दिल्ली के भिखारियों से कभी पंगा मत लेना। ये जुबां से झूठी दुआ ही नहीं बल्कि आपको चैलेंज करते हुये भीख मांगते हैं। "अगर एक बाप की औलाद हो तो इस गरीब की मदद कर।" "अगर दिल में थोड़ी सी भी लाज़ बची हो तो इस भूखे की मदद कर।" फिलहाल इनके मांग वाजिब हो सकते हैं। ये तो सभी को पता है कि इनका अपना गैंग होता है। ये लोग जहाँ कहीं प्यार में गुटरगूँ कर रहे प्यार के पंछियों को देख लिये या बस यूं ही साथ में कोई मोहतरमा आपके साथ हो तो ये और भी पीछा नहीं छोड़ते। इस काम के लिये बच्चों वाले महकमे को अच्छी सी ट्रेनिंग दी जाती है। फिलहाल ये पैसे लेने वाले लोग हर जगह पाये जाते हैं। 

2:अब बात करते हैं उन लोगों की जो मेट्रो का पता पूछते हैं और फिर आपसे पैसे की गुजारिश भी। मेट्रो स्टेशन पर लुटेरों की भरमार है। मैं आपको एक किस्सा बताता हूँ। एक बार राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के atm से मैं पैसे निकाल रहा था। उसी दौरान एक अधेड़ व्यक्ति, दिखने में ठीक ठाक मेरे पीछे आता है। मैंने सोचा ज़नाब को पैसे निकालने होंगे इसलिये atm के दरबार मे आये हुये हैं। तो ज़नाब ने पूछा कि," पैसे निकल रहे हैं?" मैंने कहा," हाँ।" "अच्छा बेटा आपके पास सौ का चेंज होगा?" ज़नाब ने पूछा। मैंने उसे 50-50 के दो कड़क नोट थमा दिये। इस आस में कि 100 का नोट उस पार्टी से आयेगा। लेकिन वो तो सौ का चेंज लिये और मुस्कुराते हुये चल दिये। मैं तो भौंचक्क खड़े के खड़े रह गया। दूसरा वाकया बताता हूँ। मूलचंद मेट्रो पर मैं मंजिल के लिये भागे जा रहा था। तभी एक लड़के ने अचानक रोककर पूछा कि आपके पास कुछ रुपये होंगे? मेरे पास मेट्रो जाने के लिये भी पैसे नहीं हैं। उस समय मैंने उसको 50 रुपये थमा दिये थे शायद। इसी सोच में कि मेरी जापान की यात्रा में इसकी दुआ लगे।

3:अब बात करते हैं भारत के झंडे वाला बैज को आपके छाती पर जबरजस्ती पहनाने वाली आंटी लोगों की. सबसे पहली बात कि इन आंटियों से सावधान रहना. ये आंटियां आपके अस्मत पे हाथ डाल सकती हैं और आप कुछ नहीं कर सकते. एक अपना वाकया बताता हूँ. मेट्रो के आस पास इनको अक्सर पाया जाता है. मैं एक दिन जल्दी में था लेकिन मेट्रो के दरवाज़े पर तैनात एक आंटी ने मेरे छाती को पकड़ने कि नाकाम कोशिश की. मैं स्मार्ट निकला और तुरंत अपने हाथों से उनके हाथों को अपने छाती पर से हटाया और चलते बना. लेकिन उस वाकये से ये बात पता चल गयी कि इनका हाथ कहाँ तक जा सकता है. एक और वाकया आपको बताता हूँ. ये बात तब की है जब मेरा इनसे पहली बार सामना हुआ था. प्रगति मैदान में हर साल अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला लगता है. मैं अपनी मित्र के साथ उस पुस्तक मेला में जा रहा था. प्रगति मैदान मेट्रो से जैसे ही उतरा दो आंटियों ने हमे घेर लिया और भारत के झंडे वाले बैज को हमें पहना दिया. मुझे लगा कि ये अच्छी बात है भारत के झंडे वाला बैज से मेरे अन्दर देशभक्ति वाली आत्मा जाग गयी. हमने बड़ी ही नम्रता के साथ शुक्रिया कहा और आगे जाने के लिये जैसे कदम बढ़ाया आंटी ने बोला, "बेटा कुछ चंदा तो दे दो." मैंने सोचा चलो ठीक है कोई बात नहीं और मैंने 20 रुपये निकाले और थमा दिए आंटी को. "बेटा ये क्या दे रहे हो?" आंटी ने प्रश्न किया. "कम से कम पचास रूपए तो बनते है?" आंटी ने फिर बोला. आज हमारे देश में किसी को अगर इच्छा से कुछ दो भी उसे लेने वाला उसकी कद्र कत्तई नहीं करेगा. उपर से आपसे ही लड़ पड़ेगा. आज कल भिखारी को 2 रूपये  दो तो वो आपसे 2 रुपये का सिक्का लेगा ही नहीं और आपको गाली भी दे देगा. फिलहाल यहाँ तो आंटी थीं. इनसे बहस तो नहीं कर सकते थे. और अचानक आपसे कुछ बोलता है तो कभी कभी तुरंत दिमाग नहीं चलता है. जिनका तुरंत चलता है, मैं उनको दुआ देता हूँ. तो मैंने 50 रूपये थमा दिये आंटी को. लेकिन उस दिन उस झंडे को लगाने से मुझे देशभक्ति की नहीं बल्कि "आंटी ने तो तुझे टोपी पहना दिया" वाली भावना आ रही थी. तो भाई लोग सावधान! 

4:अब बात करते हैं कुछ ऐसे समूह की जो शायद सही भी हो सकती है. लेकिन मेरे साथ ये वाकया दो बार हुआ है इसलिये मेरा इनपर से भी विश्वास उठ गया है. आपको हाल ही में हुये एक घटना के बारे में बताता हूँ. हम चारों मित्र अपने वापसी के रस्ते पर जा रहे थे. तभी एक अधेड़ लगभग 50 के करीब उम्र, वाला व्यक्ति हमसे बोलता है "भाई साहब आपको (******* भाषा) आती है?" मैं रुक गया और मेरे दूसरे दोस्त भी रुक गये. वह व्यक्ति बोला "हम यहाँ काम की तलाश में आये हुए थे. यहाँ आये तो सूबेदार ने हमें धोखा दिया. हमारे पास खाने के लिये पैसे नहीं हैं. मेरे साथ मेरा परिवार भी है. आप अगर मदद कर दोगे तो छोटे नहीं हो जाओगे...." एक समय लगा कि ये बन्दा सही बोल रहा है लेकिन फिर मुझे याद आया कि ऐसी ही हूबहू कहानी मैंने पहले भी सुनी थी और उस समय मैंने 100 रूपए थमा दिये थे. लेकिन इस बार हम लोगों से साफ़ मना दिया. अगर ये सही भी बोल रहे होंगे तो भी उनपर विश्वास कर पाना कठिन था. और ऐसा कतई नहीं होता कि भाई साहेब 10-20 में मान जाते. 

 तो ये थे कुछ वाकये जो मैंने आपसे साझा किया. ये सिर्फ इतना ही नहीं है. राजीव चौक, राम कृष्ण मेट्रो आदि जगहों पर भी "एक्स कियूज मी!" कहकर आपसे पैसे ऐंठने वाली युवतियां मिल जायेंगी. इसके अलावां भी बहुत अलग अलग तरीके के लुटरों से आये दिन आप भी मुख़ातिब होते होंगे.

इनसे बचने के उपाये क्या हो सकते हैं इसके बारे में बात करते हैं.

1: "एक्स कियूज मी!" वाले किसी भी चीज़ को जहाँ तक हो सके ध्यान देकर भी एकदम ध्यान मत देना. ऐसे लोगों के पास भी मत फटकना. 

2: पार्कों, स्टेशनों इत्यादि वाले जगहों पर ख़ास सावधानी बरतें. किसी महिला मित्र के साथ आप हों तो विशेष सावधानी बरतें. ख़ास तौर पर छोटे उस्तादों से. 

3: और तो आप खुद ही स्मार्ट हो लेकिन आपसे स्मार्ट आपके पॉकेट पे नज़र रखने वाले लोग हैं. बच कर रहना और सावधान, चौकन्ना भी.  

 और आखिर में ये कहते हुए मैं इस ब्लॉग को ख़तम करूँगा कि "दिल्ली दिलवालों का शहर है" इसको महसूस अभी तक नहीं किया है लेकिन इस पर विश्वास जरूर है. आप जहाँ रहो वहां की आबो हवा में साँस लेना सीख लो. तभी मज़ा है नहीं तो बस आपको हर चीज़ से शिकायत रहेगी. इस ब्लॉग को लिखने को मकसद दिल्ली शहर को बदनाम करने का कतई नहीं है. मैंने अपने अनुभव को मात्र साझा किया है.  

 और भी कुछ है . मेट्रो पे टिन का डब्बा लिये खड़ा "कैंसर पीड़ितों के लिये" वाला व्यक्ति. मेट्रो पे लाठी के सहारे पेन बेचते हुए "हिलते हुये बूढ़े ज़नाब". सड़क के डिवाइडर पर कुछ नंबर लिखे  हुये लैमिनेटेड कागज को पकड़ के बैठा हुआ "मटमैला अधेड़", "राजीव चौक के कूड़ेदानों से खाने के तलाश करता हुआ शायद "एक स्मैकिया"........

★ "भीख माँगना" "भिक्षा माँगना" "भीख देना" "दान देना": अपने दरवाज़े पर जब कोई भिखारिन "दई दे ए बिचिवा" कर दरवाज़े पर चिल्लाती है तो अन्दर से हम कुण्डी लगाकर शांत हो जाते हैं. या फिर उस भिखारिन को दुत्कारकार भगा देते हैं. पर जब कोई बाबा घंटी बजाते हुए आपके गली में दस्तक देता है तो हम "अनाज, तेल, रूपए आदि को प्लेट में लेकर दरवाज़े पर आ जाते हैं. और अपने दरवाज़े पर उनके दर्शन के लिये इंतज़ार खड़े रहते हैं. यही विडंबना कह लीजिये या फिर हमारा अपना विश्वास. 

Thursday, June 8, 2017

आँखों की काली पुतलियां

तेरी आँखों की काली पुतलियों में हमने खुद को पाया।
तेरी बहती आँसुओं में हमने खुद को पाया।
तेरी हर साँसों में खुद को जीता पाया।
तेरी हर धड़कन में खुद को धड़कता पाया।
तेरी हर मुस्कान में खुद मुस्कुराया।
फिर न जाने कब तुझसे मुहब्बत हो गयी।
तेरी झलक मेरी चाहत बन गयी।
धड़कने तुझसे मिलाने को मेरी तड़प बढ़ गयी।
तेरी झलक दिल की सुकून बन गयी।
तेरे संग की गई बातें मेरी खुशी बन गयी।
तेरी यादें अकेले सफर की हमसफ़र बन गयीं।
फिर अचानक वो दिन आया,
नज़रें वो पुरानी अब कुछ अजनबी सी बनने लगीं।
आँखों की तेरी अश्क़ों में अब खुद का आईना न पाया।
अपना सा लगने वाला कोई
अजनबी बन मुझसे, फिर कभी भी न मिल पाया।
खता कोई हो गयी थी मुझसे शायद कहीं ।
इसी शायद में हमने भी उनके संग बिताये हसीन यादों को अपना हमसफ़र बना लिया है।
वो जहां होंगे खुश ही होंगे, हमने तो उनकी काली पुतलियों में अपना मुस्कुराता आईना निहार लिया है।

Tuesday, June 6, 2017

चिराग और अंधेरा।

उनकी यादों में जलते जलते लोगों ने मुझे चिराग कहना शुरू कर दिया।
अरे हमने भी उसके अंधियारे को खुद का आईना बना लिया।
खुशी हो या गम आईना बस एक भाव बयाँ करता कि तुम नहीं हो अब कहीं नहीं हो।
तेरे सर पर  चिराग ने खुद को जलाकर क्या किया?
बस अंधेरा दिया बस अंधेरा।
उनकी यादों की तपिश, चिराग से भी ज्यादा तपती है।
अब अंधेरे से भी ज्यादा क्या?
रो जाऊं या फिर मुस्कुराऊँ?
अब अंधेरे में हो चला ये मन अंतरिक्ष सा शून्य।.......

फिर कभी मुस्कुरायेंगे, इस कारसाज़ दुनिया को अपने ग़मों को छिपाये फिर से गले लगायेंगे।

Thursday, May 25, 2017

आज फिर उन्हीं पुराने रास्तों पे कदम जब मैंने रखा।

आज फिर उन्हीं पुराने रास्तों पर कदम रखा तो,
छूटी वो मुस्कान मिली, मुस्कुराकर मुझसे पूछा कि कैसे आना हुआ ?
भटका हुआ हूँ अपने रास्तों में , भटकते हुए जब रोना आया तो बस तेरी याद आ गयी।
अरे आज ये सुनसान क्यों है?
मुस्कान मुस्कुराते हुए बोली,
बाहर कहाँ अपना सुकून ढूंढता फिरता है तू,
तेरी मुस्कान तो यहीं रह गयी थी छूट,
ख़ुश हूँ कि तुझे मेरी याद तो आयी।
देख तेरी तरह ही तेरे मित्रों के मुस्कान भी यहीं पड़े हुए हैं।
आज मैं अपनी मुस्कान को देख और आपने मित्रों के मुस्कान को देख फिर से मुस्कान लाऊंगा।
ये वाली मुस्कान बहुत ही अनमोल है, इसलिए इसे यहीं छोड़ जाता हूँ।
फ़िर रोते हुए जब मैं भटक कर आऊँ तो मुझमें फिर से मुस्कान भर देना। ☺
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Wednesday, May 17, 2017

चाँदनी अब ढल सी गयी।

कहाँ अपनी चाँदनी सी, घनी अंधियारी छा सी गयी।
जीवन में भटके इस पथिक को कोई उजियारा नहीं दिख रहा है।
इस घुटन में दम घुटने लगा है अब उसका, क्या करे, क्या करे , क्या करे?

खो दिया इस चमकते सूरज ने अपनी रौशनी को~!

उनका आना था जिन्दगी में मेरे
आशाओं की चमक से उजला दिया मेरे जीवन को;
साथ जीने मरने की कसम खायी फिर हमने
कभी होंगे न जुदा एक दूजे से....
दूरियां चाहें हो सात समुन्दर पार जितने
पर दिल के गहरायिओं से हम करीब रहेंगे
पर...
करवटें लेने लगी तन्हाई की ये बेताबी
बेवफाई के चादर से छुपा दी मैंने अपनी कमजोरी
तन्हाई की आग ने मुझे दोगला सा बनाया
खायी एक दूजे की कसम को तोड़ दिया
मंजिल तक भी न पहुँच पायी हमारा प्यार
बीच रास्ते में हमने उनसे मुँह मोड़ लिया..

अब सोचता हूँ मैं कि अपने प्यार को किससे परखूँ ??

प्यार क्या है?
ये एक विश्वास की एक कमज़ोर कड़ी है जोकि कभी भी टूट सकती है.
संजोकर रखोगे तो सारा जहां तुम्हारा होगा,
गर कहीं से कड़ी टूटी फिर विश्वास के धागे में गाँठ पड़ना लाजिमी है.

अरे हमने भी किया है प्यार किसी से, अभी भी मुहब्बत उनसे जारी है.
फिर भी जानकर हमने उनसे बेवफाई की...
तन्हाई को अपने पास बुलाया...
उससे अपनी आग को बुझाया...
लगा फिर हमे कि अब दाग लगे इस चुनरी का
कोई मोल नही रह गया...
फिर जब अपनी मुहब्बत से अपने कर्मों का मोल बताया
उसने भी बेमोल इस काफूर को अपनी बाहों से छुड़ाया.

अपने किये का ये अंजाम होना ही था
की उनसे जो बेवफाई जो ...
ये अंजाम होना ही था..
पर अब भी उन्ही से मुहब्बत है...
समझ में जो बात नही आई मुझे वो ये है कि....
प्यार का मोल आखिर किससे करूं,,,
शरीर के मेल को क्या प्यार कहते हैं...
ये फिर दिल के मेल को....
या फिर दोनों ही...
या फिर कहीं कुछ और ही है... इस चीज़ के लिये ज़िम्मेवार....

काफूर को जब उसने अपने बाहों से हटाकर फेंक दिया .....
फिर भी इस दिल में अरमान अभी बाकी हैं....
लग रहा ही ऐसे कि ये बेमोल चुनरी उसकी हाथों में कहीं  फँस सी गयी है...

मुहब्बत उनसे जारी रहेगी....
उन्हें पाने के अपने आखिरी मौके को मत गवाना
ए काफूर की बेमोल चूनर...
न जाने कौन कौन तुझे अभी इस्तेमाल करेंगे....
फिर भी हम तो उन्हीं के लिये जियेंगे और उन्हीं के लिये
मरेंगे......

Monday, May 15, 2017

そして、しばらく話せなくなった!

 

 三年前のことなんですけど、僕は自分の太陽に会った。彼女は僕の人生を明らかにした。だが、ずっと一緒にいらえないから、離れた時期も会った。彼女と最後までいけるということを約束した僕は約束をやぶった。「もう、いかん。彼女をだますことができない。」と考えて昨日彼女から別れることになった。でも、今もずっと彼女のことを愛している。たしかに、彼女のことをいつも泣かせたり、困らせたり僕はダメだった。でも、今も一番大好き。2014年3月5日~2017年5月14日の約三年間の付き合いは一生忘れない。ダメだった僕は彼女のこと愛してるけどダメはダメだ。どうしても、恋愛の回復はむりだ、彼女は僕のこと忘れるように、そして、幸せのように。
終わったようだが、まだ、希望があるかな。彼女と。。。。もうダメか。
アディ

Wednesday, September 14, 2016

Ek Baar ho Jaye.. Phir wahi.. :)


वक़्त बदल गया बदल गया है ये ज़माना
अरे हम भी तो बदल लिए फिर न जाने कुछ खो सा गया
अकेले तन्हाई में हमने जो मज़े लिए ज़िन्दगी के
कविताओं से शांत किया करते थे मचलते इस मन को
लिख कर कुछ करके कलाकारी शांत किया करते थे  इस मन को
फिर न जाने क्यों ये करवट आयी और ये सब कहीं सो सी गयी
अभी कमी नही कोई खुशियों की
जगह नही और कोई गम की
फिर भी लगी रहती एक बेचैनी छायी
जैसे खुले धूप में मौसम है बौराई
मन करता है कि फिर से एक बार उन पन्नो को पल
तन्हाई अपनी जानेजिगर से फिर से गले मिलूं
बक्श देना मेरी जिंदगी जो तेरी खातिर
पढ़ न सका गीतों की पंक्तियाँ
न जाने क्यों तेरे बिना ही ये गीत आती है
कहतीं हैं मुझसे वही चंद पंक्तियाँ
अये मुसाफिर, "एक बार हो जाए..... फिर वही. :)

Sunday, July 24, 2016

एक और नयी शुरुआत जापानी टीचर के रूप में~~

 जनाबे अली! बड़े दिनों बाद अपना ब्यौरा देने आया हूँ. लेट लतीफी के लिए माफ़ी. जानाब खुश खबर ये है की मैंने जापानी की पढाई में एक और सीढ़ी उपर आ गया हूँ. मेरी दिल्ली विश्वविद्यालय से हो रही पीजी डिप्लोमा पूरी हो गयी है इसी जून महीन में. और अभी सफ़र ज़ारी है. इसी नाते मैं  अभी इस भाषा में परास्नातक भी करने का विचार कर रहा हूँ. और वो भी समझ लीजिये की सफर की शुरुआत होने वाली है.

 अरे हाँ! मैं तो एक बात बताना भूल गया था. ये एक वाकई में मेरे जीवन की एक अच्छा पडाव है. तो भाईयों और उनकी बहनों~! खुश खबर ये है की मैं जापान फाउंडेशन में जापनी मास्टर के रूप में इसी जुलाई से पढ़ाने लगा हूँ. ये जीवन का सबसे अहम पल मानते हुए इसे अच्छे से करने का भरसक अपना सौ प्रतिशत दूंगा. और साथ ही साथ आप लोगों के दुआओं की ज़रूरत. मेरी गुरु चिआकी सनेसेई और फिर ताकेई सनेसेई और मुराकामी सनेसेई, जिन्हें मैं तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ. और मेरी नेको♥ को भी जो मेरी हमेशा से प्रेरणा रही है.

 आज के लिए इतना काफी है. फिर मिलेंगे चलते चलते ..... :)

Wednesday, November 4, 2015

自己紹介

こんにちは!私はアディティヤともうします。23歳でデリー大学で日本語を勉強しています。去年日本語を勉強しにラクナウから来ました。日本語を習っているのは3年ごろになりました。初めてはバナーラスヒンドゥー大学で日本語を勉強しました。最初はひらがなとカタカナを習って日本語で自分の名前を書きました。先生から日本のいろいろなことを教えてもらいました。日本の文化、例えば、書道、茶道をやってみました。日本で興味があって自分でもっと調べてみました。私は日本の歌、日本の映画、日本のアニメ、漫画が好きになりました。日本のことをもっと知りたい気持ちがどんどん増えてきました。ですから、日本語のあとの勉強するためにデリーに来ました。今年,デリー大学の東アジア研究科でJF-2コースに入りました。初級日本語を習って中級日本語を学ぶにこのコースに入りました。今は日本の新聞、作文、文学と聴解を学んでいます。やはりレベルが高くなってもっと頑張らなければいけないです。毎日、授業が終わって図書館で復習しています。漢字リストを作って、練習しています。私は日本のアニメが大好きので、ひまなときいつもアニメを見ています。見るときわからない単語があってメモします。こうやって聴解の練習もしています。友達の間できるだけ日本語でしゃべります。先生と話するとき日本語を使います。大学へ8月に日本人学生のグループが来ました。いっぱい日本人が友達になりました。その友達とも日本語で話しています。こうやって私は日本語が上手になるために頑張っています。

将来は日本とインドの間かけはしとして働いたいです。私は日本の有名な漫画やアニメをインドに連れて行きたいですです。日本の物語、俳句を自分の言語で翻訳してインドに連れて行きたいです。この夢を叶うために頑張っていま。
Home work :)
Naveen Panda Sensei
Delhi University
Department Of East Asian Studies
JF-2
Japanese Language Books

Wednesday, August 26, 2015

कुछ अच्छा नही चल रहा है.

  दोस्तों! कैसे हो भाई लोग? अपना भी दिल्ली में कट ही रहा है. पर आज कल कुछ अच्छा नही चल रहा है. अभी मैंने कल के ही पोस्ट में लिखा था कि हफ्ते भर रिलायंस का अत्याचार सहे. और जब हम आवाज़ कड़ी किये तो पता चला कि नुकसान तो मेरा ही हुआ है. और बाद  में मेरा आर्डर किया फ्लिपकार्ट से मोटोरोला मोबाइल भी नही आया. फिर शाम को हमारे मकान मालिक के पियकड़ भाई ने हमसे 200 रूपया भी मांग लिया और बोला कि सवेरे दे देंगे. पर अब तो शाम हो  गयी है और महाशय नज़र भी नही आ रहे हैं. और उपर से हमे और भी बुरा लग रहा है. क्यूंकि भाभी रो रही थी. वो बोल रही थी कि बच्चा बड़ा हो रहा है और इनकी दारु पीने की आदत नही जा रही है.  मैंने उनके दुःख बढाने में मदद कि थी. और आज सवेरे कि बात. मैं फीस जमा करने गया तो पटा चला कि मेरा इनरोलमेंट नंबर नही है. मेरा काम नही हुआ. फिर बैठे कल कि ट्रेन तत्काल में बुक कराने. ससुरा टाइमिंग ही खराब कि वेटिंग हो गया. राम जाने घरो जा पायेंगे कि नाही. बस येही सब तंगी में आपण मेन काम पढ़ाई नही हो रही है. दिमाग कि उथल पुथल और पैसों का जंजाल. कब मिलेगा रे छुटकारा. परेसान हैं हम.........

Tuesday, August 25, 2015

Reliance Wi-pod's WIFI SUFFERING.. :'(

 
I requested for internet connection from rcom.com website. After a person called me after about 10 days and telling me prize and plan for connection. I agreed that time because it seemed very good. Next they person named Deepak Sharma came to my house and gave a wi-pod device and collected documents and off course money also. He told me that my data card will be activated next day evening. It was 19 Aug, 2015. I checked next day 20 Aug,2015 but it was not activated. I called him, he told me that they have some server problem. He promised till next day evening, it will be activated. Again same thing happened and next two days 21 Aug and 22 Aug also and same promise was told by him. On 22 Aug Evening, he told me that my documents was sent and it will be activated soon. I tried on whole sunday and monday ie 23 and 24 Aug also. on Monday, He gave to another number to ask him. His name is Ravindra. He also promised that he would check and reply till 6:30pm. I waited and called him at 7:00pm but he did not reply. Then I wrote an SMS to both of them that I will go to office and ask for cut my connection and returned my 1800 RS. Then immediately a call from landline number came to me. His name was Prashant and he assured me to wait till today 25 Aug Morning. I waited till 12:00 pm. But all was waste. They lied. BIG CHEATERS!!!
I decided to go Reliance Center Delhi (Address-Ex Rajeet Hotel, Maharaja Ranjeet Singh Marg, Barakhamba, New Delhi).
  I went there and found what that same data card is price 499 rs only. I was totally cheated. One lady was laughing at me and told that I was cheated. I was fooled by Reliance. I could not do anything for my money. By the way, a person there solved my problem. I GOT ACTIVATED DATA CARD . But I FEEL VERY BAD for not able to do AGAINST THEM. I can not get my money back. I called after Mr. Deepak Sharma, he told me that now he don't have any relation with this issue because I activated my data card from outlet. Office was right but I met wrong person there. As he told that I had to meet Mr. Prashant or Vivek. But how can I know when I don't know hoe to reach them. I front of me there were 3 cabin where I could slove my problem and no thing else. He told that he could not do anything about it. TOTALLY CHEATERS!! THEY ARE LIARS.
Mr. Deepak Sharma- 9313186522
Mr. ravindra- 9311998182
Mr Prashant- landline no- +911130463396