Bindaas Ad
Saturday, April 11, 2026
चलो फिर से लिखते हैं !
चलो फिर से लिखते हैं,
चलो फिर कोई नज़्म लिखते हैं.
गद्य या पद्य लिखुँ, लाज़िमी है की कोई शब्द लिखूं।
मोहब्बत के अलफ़ाज़ लिखूं या समाज को लिखूं।
अवाम को लिखूं क्या खुद को लिखूं।
चलो आज फिर से लिखूं।
बंधन को लिखूं या आज़ादी को लिखूं।
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