Thursday, May 25, 2017

आज फिर उन्हीं पुराने रास्तों पे कदम जब मैंने रखा।

आज फिर उन्हीं पुराने रास्तों पर कदम रखा तो,
छूटी वो मुस्कान मिली, मुस्कुराकर मुझसे पूछा कि कैसे आना हुआ ?
भटका हुआ हूँ अपने रास्तों में , भटकते हुए जब रोना आया तो बस तेरी याद आ गयी।
अरे आज ये सुनसान क्यों है?
मुस्कान मुस्कुराते हुए बोली,
बाहर कहाँ अपना सुकून ढूंढता फिरता है तू,
तेरी मुस्कान तो यहीं रह गयी थी छूट,
ख़ुश हूँ कि तुझे मेरी याद तो आयी।
देख तेरी तरह ही तेरे मित्रों के मुस्कान भी यहीं पड़े हुए हैं।
आज मैं अपनी मुस्कान को देख और आपने मित्रों के मुस्कान को देख फिर से मुस्कान लाऊंगा।
ये वाली मुस्कान बहुत ही अनमोल है, इसलिए इसे यहीं छोड़ जाता हूँ।
फ़िर रोते हुए जब मैं भटक कर आऊँ तो मुझमें फिर से मुस्कान भर देना। ☺
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Wednesday, May 17, 2017

चाँदनी अब ढल सी गयी।

कहाँ अपनी चाँदनी सी, घनी अंधियारी छा सी गयी।
जीवन में भटके इस पथिक को कोई उजियारा नहीं दिख रहा है।
इस घुटन में दम घुटने लगा है अब उसका, क्या करे, क्या करे , क्या करे?

खो दिया इस चमकते सूरज ने अपनी रौशनी को~!

उनका आना था जिन्दगी में मेरे
आशाओं की चमक से उजला दिया मेरे जीवन को;
साथ जीने मरने की कसम खायी फिर हमने
कभी होंगे न जुदा एक दूजे से....
दूरियां चाहें हो सात समुन्दर पार जितने
पर दिल के गहरायिओं से हम करीब रहेंगे
पर...
करवटें लेने लगी तन्हाई की ये बेताबी
बेवफाई के चादर से छुपा दी मैंने अपनी कमजोरी
तन्हाई की आग ने मुझे दोगला सा बनाया
खायी एक दूजे की कसम को तोड़ दिया
मंजिल तक भी न पहुँच पायी हमारा प्यार
बीच रास्ते में हमने उनसे मुँह मोड़ लिया..

अब सोचता हूँ मैं कि अपने प्यार को किससे परखूँ ??

प्यार क्या है?
ये एक विश्वास की एक कमज़ोर कड़ी है जोकि कभी भी टूट सकती है.
संजोकर रखोगे तो सारा जहां तुम्हारा होगा,
गर कहीं से कड़ी टूटी फिर विश्वास के धागे में गाँठ पड़ना लाजिमी है.

अरे हमने भी किया है प्यार किसी से, अभी भी मुहब्बत उनसे जारी है.
फिर भी जानकर हमने उनसे बेवफाई की...
तन्हाई को अपने पास बुलाया...
उससे अपनी आग को बुझाया...
लगा फिर हमे कि अब दाग लगे इस चुनरी का
कोई मोल नही रह गया...
फिर जब अपनी मुहब्बत से अपने कर्मों का मोल बताया
उसने भी बेमोल इस काफूर को अपनी बाहों से छुड़ाया.

अपने किये का ये अंजाम होना ही था
की उनसे जो बेवफाई जो ...
ये अंजाम होना ही था..
पर अब भी उन्ही से मुहब्बत है...
समझ में जो बात नही आई मुझे वो ये है कि....
प्यार का मोल आखिर किससे करूं,,,
शरीर के मेल को क्या प्यार कहते हैं...
ये फिर दिल के मेल को....
या फिर दोनों ही...
या फिर कहीं कुछ और ही है... इस चीज़ के लिये ज़िम्मेवार....

काफूर को जब उसने अपने बाहों से हटाकर फेंक दिया .....
फिर भी इस दिल में अरमान अभी बाकी हैं....
लग रहा ही ऐसे कि ये बेमोल चुनरी उसकी हाथों में कहीं  फँस सी गयी है...

मुहब्बत उनसे जारी रहेगी....
उन्हें पाने के अपने आखिरी मौके को मत गवाना
ए काफूर की बेमोल चूनर...
न जाने कौन कौन तुझे अभी इस्तेमाल करेंगे....
फिर भी हम तो उन्हीं के लिये जियेंगे और उन्हीं के लिये
मरेंगे......

Monday, May 15, 2017

そして、しばらく話せなくなった!

 

 三年前のことなんですけど、僕は自分の太陽に会った。彼女は僕の人生を明らかにした。だが、ずっと一緒にいらえないから、離れた時期も会った。彼女と最後までいけるということを約束した僕は約束をやぶった。「もう、いかん。彼女をだますことができない。」と考えて昨日彼女から別れることになった。でも、今もずっと彼女のことを愛している。たしかに、彼女のことをいつも泣かせたり、困らせたり僕はダメだった。でも、今も一番大好き。2014年3月5日~2017年5月14日の約三年間の付き合いは一生忘れない。ダメだった僕は彼女のこと愛してるけどダメはダメだ。どうしても、恋愛の回復はむりだ、彼女は僕のこと忘れるように、そして、幸せのように。
終わったようだが、まだ、希望があるかな。彼女と。。。。もうダメか。
アディ

Wednesday, September 14, 2016

Ek Baar ho Jaye.. Phir wahi.. :)


वक़्त बदल गया बदल गया है ये ज़माना
अरे हम भी तो बदल लिए फिर न जाने कुछ खो सा गया
अकेले तन्हाई में हमने जो मज़े लिए ज़िन्दगी के
कविताओं से शांत किया करते थे मचलते इस मन को
लिख कर कुछ करके कलाकारी शांत किया करते थे  इस मन को
फिर न जाने क्यों ये करवट आयी और ये सब कहीं सो सी गयी
अभी कमी नही कोई खुशियों की
जगह नही और कोई गम की
फिर भी लगी रहती एक बेचैनी छायी
जैसे खुले धूप में मौसम है बौराई
मन करता है कि फिर से एक बार उन पन्नो को पल
तन्हाई अपनी जानेजिगर से फिर से गले मिलूं
बक्श देना मेरी जिंदगी जो तेरी खातिर
पढ़ न सका गीतों की पंक्तियाँ
न जाने क्यों तेरे बिना ही ये गीत आती है
कहतीं हैं मुझसे वही चंद पंक्तियाँ
अये मुसाफिर, "एक बार हो जाए..... फिर वही. :)

Sunday, July 24, 2016

एक और नयी शुरुआत जापानी टीचर के रूप में~~

 जनाबे अली! बड़े दिनों बाद अपना ब्यौरा देने आया हूँ. लेट लतीफी के लिए माफ़ी. जानाब खुश खबर ये है की मैंने जापानी की पढाई में एक और सीढ़ी उपर आ गया हूँ. मेरी दिल्ली विश्वविद्यालय से हो रही पीजी डिप्लोमा पूरी हो गयी है इसी जून महीन में. और अभी सफ़र ज़ारी है. इसी नाते मैं  अभी इस भाषा में परास्नातक भी करने का विचार कर रहा हूँ. और वो भी समझ लीजिये की सफर की शुरुआत होने वाली है.

 अरे हाँ! मैं तो एक बात बताना भूल गया था. ये एक वाकई में मेरे जीवन की एक अच्छा पडाव है. तो भाईयों और उनकी बहनों~! खुश खबर ये है की मैं जापान फाउंडेशन में जापनी मास्टर के रूप में इसी जुलाई से पढ़ाने लगा हूँ. ये जीवन का सबसे अहम पल मानते हुए इसे अच्छे से करने का भरसक अपना सौ प्रतिशत दूंगा. और साथ ही साथ आप लोगों के दुआओं की ज़रूरत. मेरी गुरु चिआकी सनेसेई और फिर ताकेई सनेसेई और मुराकामी सनेसेई, जिन्हें मैं तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ. और मेरी नेको♥ को भी जो मेरी हमेशा से प्रेरणा रही है.

 आज के लिए इतना काफी है. फिर मिलेंगे चलते चलते ..... :)

Wednesday, November 4, 2015

自己紹介

こんにちは!私はアディティヤともうします。23歳でデリー大学で日本語を勉強しています。去年日本語を勉強しにラクナウから来ました。日本語を習っているのは3年ごろになりました。初めてはバナーラスヒンドゥー大学で日本語を勉強しました。最初はひらがなとカタカナを習って日本語で自分の名前を書きました。先生から日本のいろいろなことを教えてもらいました。日本の文化、例えば、書道、茶道をやってみました。日本で興味があって自分でもっと調べてみました。私は日本の歌、日本の映画、日本のアニメ、漫画が好きになりました。日本のことをもっと知りたい気持ちがどんどん増えてきました。ですから、日本語のあとの勉強するためにデリーに来ました。今年,デリー大学の東アジア研究科でJF-2コースに入りました。初級日本語を習って中級日本語を学ぶにこのコースに入りました。今は日本の新聞、作文、文学と聴解を学んでいます。やはりレベルが高くなってもっと頑張らなければいけないです。毎日、授業が終わって図書館で復習しています。漢字リストを作って、練習しています。私は日本のアニメが大好きので、ひまなときいつもアニメを見ています。見るときわからない単語があってメモします。こうやって聴解の練習もしています。友達の間できるだけ日本語でしゃべります。先生と話するとき日本語を使います。大学へ8月に日本人学生のグループが来ました。いっぱい日本人が友達になりました。その友達とも日本語で話しています。こうやって私は日本語が上手になるために頑張っています。

将来は日本とインドの間かけはしとして働いたいです。私は日本の有名な漫画やアニメをインドに連れて行きたいですです。日本の物語、俳句を自分の言語で翻訳してインドに連れて行きたいです。この夢を叶うために頑張っていま。
Home work :)
Naveen Panda Sensei
Delhi University
Department Of East Asian Studies
JF-2
Japanese Language Books